सोशल मीडिया संचार प्रचार का साधन :
जिस एक ज़माने मे लोग एक-दूसरे तक अपनी बात चिट्टियों के द्वारा पहुँचाया करते थे, एक चिट्ठी को सामने वाले व्यक्ति तक पहुँचने मे कई समय लग जाया करता था, वही दूसरी ओर आज लोग अपनी बात सामने वाले व्यक्ति तक तुरंत Message or Chat के द्वारा पहुँचा देते हैं। कई दिनों तक का फाँसला चंद Microsecs तक पहुँचाने मे Social Media का बेहद खूबसूरत योगदान रहा है।
लेकिन....
वहीं व्यक्ति का Socialize (सामाजिक होने) का स्तर घटता हुआ नज़र आता दिख रहा है -
चिट्टियों/फोन कॉल के ज़माने मे लोग एक-दूसरे से सामाजिक होना पसंद करते थे।
वहीं आज posts, trends, reels, Stories, Shorts, Status, Dp यहीं तक सामाजिकता सीमित होकर रह गयी है।
आज भले कॉल के साथ Camera भी है। Live Chats भी है... लेकिन व्यक्ति असल जिंदगी में Social होना भूलता जा रहा है।
चिट्टियों, टेलीफोन का वो ज़माना बेहद खूबसूरत लम्हों को याद दिलाता है जहाँ लोग असल जिंदगी में सामाजिक थे।
अपने परिवार, रिश्तेदारों, आस-पड़ोस, दोस्तों सबसे वास्तव मे सामाजिक थे।
जहाँ एक-दूसरे के लिए शब्द मन से निकलते थे। केवल मुख व हाथ की उँगलियों से नही!
Bitter truth
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