जिस जिस पर ये समाज हँसा है, उस उस ने इतिहास रचा है!

अगर ठान लिया है कुछ, तो आँखों में बसा उसे...

देखता आया है जिन सपनों के सपने, हकीकत बना उसे...

बढ़ा लिया है अगर एक कदम, तो मुड़ कर न देख पीछे...

कर ले अपने हौंसले बुलंद, अगर ये ज़माना तुझे खेंच पीछे...


क्योंकि जिस जिस पर ये समाज हँसा है, 

उस उस ने इतिहास रचा है...


मत बना इस समाज की बातों को अपनी रुकावट की दीवार...

अगर हौंसले पस्त होने लगें, तो कर ले खुद को तैयार...

जा जी ले अपनी ज़िंदगी, और उड़ ले जहां तू चाहता है उड़ना...

क्योंकि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...


जिस जिस पर ये समाज हँसा है,

उस उस ने इतिहास रचा है....!


                                  -दीक्षा

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